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चंडीगढ़: 30 अक्टूबर:- आरके विक्रम शर्मा:- आज शरद पूर्णिमा की रात्रि का हर किसी को बखूबी इंतजार रहता है! यह रात्रि अनेकों प्रकार के मनोरथ पूर्ण करती है! ट्राइसिटी में भी शरद पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से आयोजित किए जाने की तैयारियां चरम सीमा पर हैं।। अनेकों मंदिरों में रात 8:00 बजे से 12:00 बजे तक शरद पूर्णिमा महोत्सव में भगवान श्री कृष्ण राधा जी व चंद्रमा देवता का गुणगान किया जाएगा। भजन कीर्तन से आस्थावानों को मंत्रमुग्ध किया जाएगा। और हर श्रद्धालु अपने अपनी इच्छा और धर्म पद्धति अनुसार शरद पूर्णिमा की रात का लाभ उठाएंगे। अनेकों जगहों पर आयुर्वेदाचार्य आयुर्वेद की पुरातन पद्धतियों द्वारा अनेकों रोगियों खासकर अस्थमा व चमड़ी के रोगियों को दवाइयां भी खीर में मिलाकर बाटेंगे। दूध चावल और शक्कर की खीर बनाकर शरद पूर्णिमा की रात्रि को चंद्र देव की खिली रोशनी में चांदनी में रखी जाती है। और आज की चंद्रमा की हर छटा देखते ही बनती है। और उसकी चांदनी से अमृत बरसता है। जो कि अनेकों रोगों को हरने वाला होता है। पंडित रामकृष्ण शर्मा जी के मुताबिक चर्म रोगों में, अस्थमा रोगों में चंद्रमा की आज की चांदनी प्रबल चिकित्सीय गुण लिए होती है। पुत्र प्राप्ति और संतान प्राप्ति की इच्छा के लिए महिलाएं खीर बनाकर आज अपने अपने घर की छतों पर, मुंडेर पर रखती हैं और चंद्रमा की चांदनी उन पर पड़ती है। इस दौरान धर्म परायण महिलाएं और परिवार चंद्र देव की नाना प्रकार से स्तुति भी करती हैं। और चंद्रमा को आज अपने मन इच्छा द्वारा जल में दूध व सफेद फूल मिलाकर अर्घ्य अर्घ्य दिया जाता है। यार गया अपनी आस्था और भावना के मुताबिक रात को भी दे दिया जाता है। और सुबह सवेरे में चंद्र दर्शन करते हुए अर्घ्य दे दिया जाता है। और अपनी मनवांछित इच्छा भगवान से व्यक्त की जाती है। और उनसे उसको सफल करने की विनती की जाती है।

