उत्तरी भारतधर्मसाहित्य-संस्कार

महिला की अर्थी को सिपाही का कंधा……

इंसानियत से अभिभूत वर्दी खाकी

अल्फा न्यूज इंडिया ःःभारतीय संस्कृति के अनुसार जब पत्नी का देहांत हो जाता है, तो उसका पति कंधा देता है, लेकिन परिस्थिति को शायद कुछ और ही मंजूर था।

एक महिला जिसका गंभीर बीमारी की वजह से निधन हो गया, पति जीवित था लेकिन कंधा देने से मना कर दिया, घर में जवान बेटी थी, अपने पिता को खबर भी दी लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा, बेबस लाचार बेटी उसके पास इतना पैसा भी नहीं था कि अंतिम संस्कार कर पाती, बात नहीं बनी तो कुछ सुझा और पुलिस को सूचना दी, फिर पुलिस तो हर रूप में आ जाती है।

#प्रयागराज #थाना #सोरांव की #चौकी #फाफामऊ से #का०बिजेंद्रयादव व #म०काँन्स्टेबल_ममता उसके घर पहुँचे। यहाँ एक विचित्र बात ये भी है कि बेटी के आँसू पोंछने वाला भी कोई नहीं था। मोहल्ले वाले भी न जाने कब की दुश्मनी निकाल रहे थे। ये समय ऐसा होता है जब इंसान टूट जाता है।

……ख़ैर बिजेंद्र और ममता ने जब उसके घर पहुँचकर कहानी सुनी तो दंग रह गए। बेटी रोए जा रही थी।
ममता ने उसे चुप कराया और बिजेंद्र ने बिटिया से अंत्येष्टि का पूर्ण ख़र्चा उठाने के लिए आश्वासन देकर पैसे दिए और एक युवक को भेजकर अंत्योष्टि का पूरा सामान मँगवाया।
अर्थी तैयार कर इसे स्वयं काँन्स्टेबल विजेंद्र द्वारा कंधा देकर शमशान घाट ले जाया गया और उनका हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार की क्रिया संम्पन्न कराया गया।
“अल्फा न्यूज इंडिया की दोनों मानवता के प्रहरियों को नमन”

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