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46 वीं वर्षगांठ “रक्तबीज” मंचन के साथ अभिनेत मनाएगा

चंडीगढ़ : 25 फरवरी ; विक्रमा/अल्फ़ा न्यूज इंडिया ;—-रिश्तों की पेचीदगी का प्रदर्शन करते हुए, अपनी 46 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए, चंडीगढ़ का सबसे पुराना थिएटर ग्रुप अभिनेत, प्रसिद्ध निर्देशक / अभिनेता / लेखक विजय कपूर के निर्देशन में शंकर शेष का कालजयी नाटक ‘रक्तबीज’ को 25 फरबरी को टैगोर थिएटर चंडीगढ़ में शाम 6 बजे प्रस्तुत करेगा। यह नाटक हरियाणा कला परिषद, सांस्कृतिक कार्य विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन, कोर पीआर और वेलकिन द्वारा समर्थित है।
रक्बीज का नाटक, मानव के अंदर के राक्षसों से निपटता है, जो इसके लिए चाहे जितनी कीमत चुकाएँ, सब कुछ हासिल करना चाहते हैं। वे अपने जीवन साथी के सपनों और संवेदनशीलता को रौंदने की हद तक भी जा सकते हैं। दुष्ट दानव रक्बीबीज के रक्त की बूंदों की तरह यह ज़हर फैलता ही जाता है। कथानक मोटे तौर पर हत्या और आत्महत्या पर आधारित है और दर्शकों को दो जोड़ों के जीवन के माध्यम से नाटकीय यात्रा पर ले जाता है, जो एक दूसरे का उपयोग करने के खेल में उतर जाते हैं। निर्देशक दो उदाहरणों के साथ स्थितियों का प्रदर्शन करने के लिए ख़ास तकनीक का इस्तमाल करता है। पहले उदाहरण के दौरान, दर्शकों का परिचय एक मेहनती क्लर्क, श्री शर्मा और उनकी कामकाजी पत्नी सुजाता से होता है। जीवन के वास्तविक सुखों का आनंद लेने के लिए श्री शर्मा अपने सपनों को साकार करके इसे बड़ा बनाना चाहते हैं। अपने अच्छे काम के बाबजूद जब शर्मा को नौकरी में उन्नति नहीं मिलती तो वो एक दिन वह अपने एमडी को ड्रिंक एंड डिनर पार्टी के लिए आमंत्रित करता है । हालांकि सुजाता ने इस पर आपत्ति जताती है पर वह अपनी खूबसूरत पत्नी का इस्तेमाल एमडी, श्री माथुर को फ़साने करने के लिए करता है। दूसरा उदाहरण एक मेहनती वैज्ञानिक डॉ शांतनु के बारे में है, जो अपने निर्देशक श्री गोयल का उपयोग करके अपने अनुसंधान को दुनिया भर में पहचान दिलवाना चाहता है। डॉ गोयल, डॉ शान्तनु का रिसर्च अपने नाम से प्रकाशित करते हैं और अंततः आत्महत्या कर लेते हैं ताकि सच्चाई कभी सामने न आए। वो दोहरी महिमा प्राप्त कर शांतनु को दुखी और असहाय बना देता है।
नाटक के प्रमुख कलाकार, गौरव आहूजा, बबीता कपूर, संजय मल्होत्रा, शुभम वशिष्ठ, प्रणव वशिष्ठ और गौतम प्रकाश हैं।
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