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अब वक्त आया कोरोना को हराने का, पर अपने ही दम पर

प्रशासन और सरकार से अब नागरिकों को असुरक्षा का भय सता रहा है

चंडीगढ़: 29 मई: आरके विक्रमा शर्मा/ करण शर्मा:– देशभर में जैसे-जैसे कोरोना महामारी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है! वैसे-वैसे सरकार भी अपने दायित्वों से पीछे हटती जा रही है! और सारी जिम्मेदारी जवाबदेही नागरिकों पर ही छूट दी जा रही है अब पॉजिटिव रोगियों की भी कोई पूछ पहचान नहीं रही! ऐसा भुक्तभोगीयों का हाल देखकर बखूबी पता लग रहा है! अब तो सेंपलिंग और लैब टेस्टिंग के भी चार्जेस वसूल की जा रही हैं। दिल्ली में दिल्ली के लोगों द्वारा हाहाकार मचाया जाने के बाद भी सरकार टस से मस नहीं हो रही है। उसी तरह देश भर में हाहाकार अब सरकार की भी अपनी नई नीतियों के नीचे दब कर रह गया है। सरकार अब सिर्फ कागजी कार्रवाई और जुर्माने करने के सिवा कुछ नहीं कर पाएगी। अब तो कोरोनावायरस पॉजिटिव केसों को अपना ट्रीटमेंट खुद करना होगा। और फेल होने पर अपना जनाजा भी अपने कंधों पर अकेले लादकर श्मशान घाट जाकर संस्कार करना होगा। चंडीगढ़ में भी संक्रमितों के आने की गति धीमी होती तो बिल्कुल नहीं दिखाई दे रही है।

दिल्ली रोहिणी क्षेत्र से खबर आ रही है कि वहां संक्रमित के सैंपल लिए गए और फीस भी वसूली गई और पॉजिटिव रिपोर्ट सिर्फ रोगी के मोबाइल पर दी गई। उनके घर को सैनिटइज भी नहीं किया गया। घर में दो बच्चियों और उनकी मां के भी सैंपल नहीं लिए गए। खबर लिखे जाने तक तीसरे दिन भी उनके घर कोई भी सरकारी डॉक्टर या प्रशासन का जिम्मेदार अधिकारी आदि रोगी को दवा दारू देने या कुशल क्षेम पूछने तक नहीं आया। ऐसे दर्जनों नहीं अनेकों केस घरों में ही कैद होकर अभावग्रस्त जीवन जीते हुए मौत से दो-दो हाथ कर रहे हैं।

पंजाब में दुकानों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग न रखने पर  2000 रुपए का जुर्माना, थूकने और मॉस्क न पहनने पर 500 रुपए जुर्माना वसूलने के पंजाब सरकार ने सख्त आदेश जारी किए हैं। लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर सरकार ने अपने सुबे के नागरिकों को ठेंगा दिखा दिया है। 31 मई को लॉक डाउन का चौथा चरण भी समाप्त हो रहा है। ऐसे में सरकार ने आगे की भावी रणनीति क्या बनाई है। इसके बारे में भी मीडिया तक में भी कोई कोरा कयास भी नहीं है।। चंडीगढ़ या पंजाब में ही नहीं बल्कि समूचे देश में इस तरह की अव्यवस्थाएं अब खुलेआम देखने को मिलेंगी। लोगों को सावधानी से जीवन जीने की ओर प्रेरित होना होगा, और आत्मनिर्भर भी।। क्योंकि अब सरकार या प्रशासन तो अपना पल्ला झाड़ कर सिर्फ आदेश देने पर आमादा हो चुकी है।।

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